Saturday, January 18, 2014

क्या आप जानते कि भारत वर्ष के इन गाँवों में आज भी संस्कृत बोलते हैं लोग ?

क्या आप जानते कि भारत वर्ष के इन गाँवों में आज भी संस्कृत बोलते हैं लोग ?
संस्कृत संस्कार देने वाली भाषा है... अत: उसके नित्य उच्चारण से व्यक्ति के जीवन जीने की शैली अधिक भारतीय हो जाती है, उच्च आदर्शों के निकट पहुँचने में सहायक बनती है...

आज देश में ऐसे अनेक गाँवों में लोगों की आपसी बोलचाल की भाषा संस्कृत बन चुकी है। इन गाँवों में दैनिक जीवन का सम्पूर्ण वार्तालाप सिर्फ संस्कृत में ही किया जा रहा है।

ऐसे ग्रामों में सबसे महत्वपूर्ण नाम है कर्नाटक के मुत्तुर व होसहल्ली और मध्य प्रदेश के झिरी गाँव का, जहाँ सही अर्थों में संस्कृत जन-जन की भाषा बन चुकी है।

इन ग्रामों में लगभग 95 प्रतिशत लोग संस्कृत में ही वार्तालाप करते हैं। मुतरु, होसहल्ली व झिरी के अलावा मध्य प्रदेश के मोहद और बधुवार तथा राजस्थान के गनोडा भी ऐसे ग्राम हैं जहाँ दैनिक जीवन का अधिकांश वार्तालाप संस्कृत में ही किया जाता है।

सिर्फ एक-दूसरे का हालचाल जानने के लिए ही नहीं बल्कि खेतों में हल चलाने, दूरभाष पर बात करने, दुकान से सामान खरीदने और यहाँ तक कि नाई की दुकान पर बाल कटवाते समय भी संस्कृत में ही वार्तालाप देखने को मिलता है।

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