Friday, January 31, 2014

दिल की सुनने में आने वाले 7 challenges

हम  अक्सर  सुनते  हैं  कि  हमें  अपने  दिल की सुननी चाहिए …जिस  काम  में  मन  लगे  वो  करना  चाहिए …अपने  passion को  follow करना  चाहिए …, उसी को अपना career बनाना चाहिए …etc.  ये  बातें  बिलकुल  सही  हैं , मैंने  खुद  भी  अपने  कुछ  articles में  इन चीजों पर जोर दिया है ,  पर एक सच ये भी है कि  हममे  से  ज्यादातर  लोग  ऐसा  नहीं  करते. तो सवाल उठता है कि क्यों ज्यादातर लोग लाइफ में जो आसानी से मिल जाता है उसे ही अपनी किस्मत मान लेते हैं और  बस  यूँही  सस्ते  में  अपनी  ज़िन्दगी  बिता  देते  हैं ?
ऐसा शायद   इसलिए  होता  है  क्योंकि  दिल  की  सुनना   आसान  नहीं  होता …इसमें  कई  challenges आते  हैं , और  आज  मैं  ऐसे  ही  कुछ  challenges के  बारे में  आपसे  अपनी  thoughts share कर  रहा  हूँ .  इन्हें  share करने  का  मेरा  motive ये  है  कि  यदि  आप  उनमे  से  हैं  जो   अपने  सपनो   को  पूरा  करने  में  लगे  हैं  या future में लगने वाले हैं तो   इन  challenges से  घबराएं  नहीं …आप  अकेले  इनका  सामना  नहीं  कर  रहे  हैं …आपकी  gene का  हर  आदमी  more or less in challenges को  face करता है ,  कुछ इनके आगे निकल  जाते  हैं तो कुछ हार मान लेते  हैं. अब ये आप पर depend करता है कि आप क्या करते हैं!!!
तो आइये जानते हैं इन 7 challenges को :
1)      Society का  opposition:
यदि  आपका  passion लीक  से   हटकर  हो  तो  आप  को  समाज  के  विरोध  के  लिए  तैयार  रहना  चाहिए . सबसे  ज्यादा  opposition तो  आपकी  family से  ही  हो सकता है …क्योंकि  वही  आपकी   सबसे  अधिक  चिंता  करते  हैं . ख़ास  तौर  पर  middle class families जहाँ  job को  ही  सबसे  safe माना  जाता  है  वहां  यदि  आप  कुछ  entrepreneurial करने  का  सोचते  हैं  तो  family आपके  खिलाफ  हो  जाती  है . उनका विरोध  human nature के इस fact को दर्शाता है कि हम unknown या  कुछ  नए  को  accept करने  से  डरते  हैं  ….पर  जब  आप  अपने  काम  में  लगे  रहते  हैं  तो  धीरे  धीरे  वही  लोग  आपकी  मदद  में  सामने  आ   जाते  हैं . इसलिए  इस  initial opposition को  part of process समझें  और  इससे  घबराये  नहीं . जहाँ  तक  हो  सके  बस  अपनी  family को  confidence में  लेने  का  प्रयास  करें , बाकियों  का  तो  सोचे  भी  नहीं .
2)      दोस्त  आगे  निकल  जाते  हैं :
सभी  का  अपना -अपना  friend circle होता  है , मौज – मस्ती  होती  है .. exam की  tension होती  है … हम  बड़े  होते  हैं  और  फिर  ज़िन्दगी  की  so called race में  लग  जाते  हैं …..ज्यादातर   लोग  conventional wisdom अपनाते  हुए , doctor ,engineer, सरकारी  नौकरी …etc के  चक्कर  में  लग जाते  हैं  और  देर -सबेर  इसमें  कामयाब  भी  हो  जाते  हैं . अगर  सचमुच  आप  दिल  से  यही  करना  चाहते  थे तो  इसमें  कोई  बुराई  नहीं  है ….दिल  की  सुनना  हमेशा ….singer , cricketer या  actor बनना ही नहीं  होता ….ये  Engineer, doctor बन  कर  देश  की  सेवा  करना  भी  हो  सकता  है .  और  एक  दूसरे  case में  भी  यह  करना  सही  है – जब  आप  clear नहीं  होते  की  आप  दरअसल  life में  करना  क्या  चाहते  हैं,  तो  भी  आप  यही  रास्ता  चुन सकते हैं  ..इसमें  कम  से  कम  आप  financially secure रहेंगे , जो  कि  बेहद  ज़रूरी  है .
Challenge तब  आता  है  जब  आप  अपने  life goals को  लेकर  clear होते  हैं , और  अपने  रास्ते  पर  निकल  पड़ते  हैं .  और  ऐसा  life की  किसी  भी stage में    हो  सकता  है , पहले  हो  जाता  है  तो  ठीक  है , पर  अधिकतर  ये  clarity थोड़ी  देर  से  आती  है  इसलिए  जब  आप  इस  दिशा  में  बढ़ते  हैं  तो  आप  पाते  हैं  कि  अभी  आपने  शुरुआत  भर  की  है  और  आपके  बाकी  दोस्त  conventional path follow करते  हुए  एक  well- settled life ( society की  नज़र  में ) की  तरफ  बढ़  चुके  हैं .  यहाँ  आपको  थोड़ी  उलझन  हो  सकती  है , आपके  मन  में  doubt आ  सकता  है  कि  आप  ही  की  उम्र  के  लोग  इतने  पैसे  कमा  रहे  हैं  और  आप  अभी  struggle ही  कर  रहे हैं …..ऐसा  लग  सकता  है  कि  आप  कहीं  गलती  तो  नहीं  कर  रहे  हैं , और  यहीं  पर  आपको  डंटे  रहना  है .
अपने  काम  में  believe करिए , इन  distractions की  life बहुत  छोटी  होती  है , अगर  आप  सचमुच  अपने  काम  को  लेकर  passionate हैं  तो  आप  जल्द  ही  इनसे  पार  पा  लेंगे .  जब  अमिताभ  बच्चन  को  27-28 साल  की  उम्र  में  पहली  बार   फिल्मो में  ब्रेक  मिला  था  तो  उस  वक़्त  तक  उनके  भी  बहुत  सारे  classmates अच्छी  नौकरियों  में   settle हो  चुके थे , ऐसे  में उनके  भी  अन्दर  सवाल  उठे  होंगे , पर  उन्होंने  उन  distractions को  खुद  पर  हावी  नहीं  होने  दिया  और  इतने  महान  अभिनेता  बने .
आप  भी  औरों   के  आगे  निकलने  से  परेशान  मत  होइए , ….लम्बी  race के  घोड़े  शुरू  में  धीमे-धीमे  ही  दौड़ते  हैं .
3)      सफलता  के  लिए  लम्बा  इंतज़ार :
कई  बार  लोग  कामयाबी  के  बहुत  करीब  पहुच  कर  हार  मान  लेते  हैं . आपको  ध्यान  देना  होगा  कि  आप  अपने  काम  को  अंजाम  तक  पहुचाएं , किसी  भी  काम  को  करने  में  time तो  लगता  ही  है  और  जब  काम  बड़ा  हो  तो  समय  भी  बड़ा  लगता  है .
Kentucky Fried Chicken (KFC) के founder Colonel Sanders ने जब अपनी business idea के लिए लोगों को convince करना चाहा तो उन्हें हज़ार से भी  अधिक बार ना सुननी पड़ी. वह अपनी कार में एक शहर से दूसरे शहर घूमते रहे और restaurant मालिकों से मिलते रहे , और इस दौरान कई बार उन्हें अपनी कार में ही सोना पड़ता था. पर इतनी ना सुनने के बाद भी उन्हें अपनी चिकन बनाने की secret recipe पर यकीन था और देर से ही सही पर उन्हें सफलता मिली और आज KFC दुनिया भर में एक successful brand के रूप में जाना जाता है.
4)      आपके  दिल  का  काम  financially rewarding ….नहीं  भी  हो  सकता  है  :
May be आप  जिस  चीज  को  लेकर  passionate हैं  वो  आपको  satisfaction तो  दे  पर  उतने  पैसे  ना दे . For example आप  as a social activist काम  करना  चाहते  हों , या  किसी  NGO के  लिए  अपना  time देना  चाहते  हों .  तो  ऐसे  में  आपको  पहले  से  अपना  mind make-up कर  के  रखना  होगा  कि  आप  वो  पा  रहे  हैं  जो  पैसे  से  नहीं  पाया  जा  सकता  और  इसी  सोच  के  साथ  आपको  अपने  काम  में  लगे  रहना  होता  है .
यहाँ  मैं एक  चीज  ज़रूर  कहना चाहूँगा  कि  ऐसी  fields में  भी  जब  आप  fully involved हो  कर  काम  करते  हैं  तो  देर -सबेर  आपको  financially भी  इसका  reward मिलता  है , आप  निःस्वार्थ  भाव  से  अपने  काम  में  लगे  रहिये  आपका  काम  ही  आपका  reward है .
5)      Boredom:
 ऐसा भी  होता  है  कि आप   जिस  चीज को  करना बहुत अधिक  पसंद  करते  हैं  उसी  को  करने  में  बोरीयत  होने  लगे , ऐसे  में  आपको  ये  नहीं  सोचना  चाहिए  कि  आपका  passion ख़तम  हो  गया  है  बल्कि  अपने  काम  को  interesting बनाने  के  लिए  नए  तरीके  और  ideas खोजने  चाहिए . कुछ  दिन  में  खुद -बखुद  boredom ख़तम  हो  जायेगा  और  आप  फिर  से  उसी  जोशो -जूनून  के  साथ  अपने  dream को  pursue कर  पायेंगे .
इतना  ध्यान  रखिये  कि  अपने  दिल  की  सुनने  वाला  हर एक  सफल  व्यक्ति  कभी  ना  कभी  इस  phase से  गुजरता  है  इसलिए  अगर  आप  भी  इस  phase से  गुजरें तो  just be relaxed….ये  भी  सफलता   के  मार्ग  में  आने  वाले  एक  पड़ाव  भर  है .
6)      Focus loose करना  :
I think ये  सबसे  बड़ा  challenge है  जो  ज्यादातर  सपनो  को  पूरा  नहीं  होने  देता . मेरी तरह आपने भी कई  बार  लोगों  को  यह  कहते   सुना होगा   कि  , “ Well begun is half done….पहला  step लेना  ही  सबसे  कठिन  है  उसके  बाद  सब  हो  जाता  है ….etc” पर  मुझे  लगता  है  कि  पहला  step लेना  आसान  है , आप  कोई  भी  काम  कुछ  effort डाल  कर  शुरू  कर  सकते  हैं …कठिन  तो  उसे  पूरा करना है, उसमे सफलता पाना है.
होता  क्या  है  कि  आप  पूरी  energy के  साथ  अपने  दिल  के  कहे  रास्ते  पर  बढ़ते  हैं  , पर  कुछ दूर  जाने  के  बाद  ही  आपको  कई  नए  alternatives दिखने  लगते  हैं ….आपके  मन  में  आने  लगता  है  कि  शायद  ये  काम  छोड़  कर  वो  करें  तो  ज्यादा  अच्छा  रहेगा … फिर  आप  जो  कर  रहे  होते  हैं  उसमे  आपका  focus कम  होने  लगता  है …आप  दूसरी  idea की  तरफ  attract होने  लगते  हैं …और  ऐसा  करने  से  आप  जो  कर  रहे  होते  हैं  उसमे  भी  आप  अपना  100% नहीं  दे  पाते  हैं  and ultimately success से  दूर  रह  जाते  हैं . इसलिए  ज़रूरी  है  कि  आप  अपने  आगाज़  को  अंजाम  तक  पहुंचाएं , बीच  में  अपना  focus ना  loose करें .
स्वामी विवेकानंद ने  भी  सफल  होने  के  लिए  यही  मन्त्र  दिया  है , “
“ एक विचार लो . उस  विचार  को  अपना जीवन  बना  लो - उसके  बारे  में  सोचो  उसके  सपने  देखो , उस  विचार  को  जियो  . अपने मस्तिष्क , मांसपेशियों , नसों , शरीर  के  हर  हिस्से  को  उस विचार में  डूब  जाने  दो , और  बाकी  सभी विचार  को  किनारे  रख  दो . यही सफल  होने  का तरीका  है.”
7)      आपको  ये  पता  चलना  कि  आप  जो  कर  रहे  हैं  वो  आपका  passion नहीं  है :
Shockingggg !!! लेकिन  ये  एक  बहुत  ही  common  scenario है, भले ही आप खुद इसे accept करने से कतराएं  .
हर  दिन  हर  पल  हम  बदल  रहे  हैं , हम  तब  तक  अपनी  true liking नहीं  जान  पाते  जब  तक  हम  उस  काम  को  practically कर  के  नहीं  देखते . हम  कोई  article पढ़  के , कोई  program देख  के, किसी  दोस्त  के  influence में , या  किसी  और  वजह  से  किसी  काम  को   अपना  passion समझ  लेते  हैं  और  उसे  करना  शुरू  करते  हैं  पर  कुछ  दिनों  बाद  ही  हम उस  काम  से  उबने  लगते  हैं , to the extent that हम  उसे  करना  ही  नहीं  चाहते . यह  कुछ  कुछ  Boredom जैसा  ही  है  पर  ये  boredom का  बहुत बड़ा और बिगड़ा हुआ रूप  है  जिसमे  आप  धीरे -धीरे  उस  काम  को  ना  करने  के  excuses खोजने  लगते  हैं .
जब  ऐसा  हो  तो  क्या  करें ? Simple, अपने  नए  passion की  तालाश  शुरू  करें , और  उसे  भी  practically apply करके  देखें , और  अगर  इस  बार  भी  आपको  लगे  कि ये आपके  दिल  की  आवाज़  नहीं  है  तो  फिर  अपने  असली  जूनून  को  खोजने  में  जुट  जाएं .  ये  जीवन  भर  बेमन  का  काम  करने  से  अच्छा  है  कि  देर  से  ही  सही  पर  आप  अपना  passion खोज  पाएं , और  जब  तक  आपको  यह  नहीं  मिलता  तब  तक  खुद  को  financially support करने  के  लिए  कुछ  और  भी  करते  रहे ,may be a 9 to 5 job…tuition पढ़ाना …family business….etc, पर  अपने  passion की  तालाश   को  रोकें  नहीं …उसे  खोज  निकालें …एक दिन यही  खोज  आपको  mediocre life से निकाल  कर  superior life की  तरफ  ले जायेगी.
Friends, तो  ये  थे  वो  सात  challenges जो  आमतौर  पर  आपको   दिल  की  आवाज़  सुनने   में  face करने  पड़ सकते  हैं , पर ध्यान रहे कि ये  कोई  comprehensive list नहीं  है  , इसके  आलावा  भी  कई  और  challenges हैं  जो  आपके  सामने  आ  सकते  हैं  , जैसे  कि  पैसों  की  कमी , परिवार  की  जिम्मेदारी , etc. पर  इन  सब  के  बावजूद passionate लोग  वो  सब  कुछ  कर  गुजरते  हैं  जो  वो  करना  चाहते  हैं ….आप  भी  इन  challenges की  वजह  से  अपने  जोश  को  ठंढा  मत  पड़ने  दीजिये  और  अपने  dreams को  reality बना  कर  दिखाइए , तभी  जीने  का  असली  मजा  है .

कैसे सीखें अंग्रेजी बोलना ?

1. अपना महौल English बनाएं  : किसी  भी  भाषा  को  सीखने  में  जो  एक  चीज  सबसे  महत्त्वपूर्ण  होती  है  वो  है  हमारा  environment, हमारा  माहौल .  आखिर  हम  अपनी  मात्र -भाषा  छोटी  सी  ही  उम्र   में  कैसे  बोलने  लगते  हैं :- क्योंकि   24X7 हम  ऐसे  माहौल  में  रहते  हैं  जहाँ  वही  भाषा  बोली  , पढ़ी, और  सुनी  जाती  है .  इसीलिए  अंग्रेजी  बोलना  सीखना  है  तो  हमें  यथा  संभव  अपने  माहौल  को  English बना  देना  चाहिए .  इसके  लिए  आप  ऐसा  कुछ  कर  सकते  हैं:
•         हिंदी  अखबार  की  जगह  English Newspaper पढना  शुरू  कीजिये .
•         हिंदी  गानों  की  जगह  अंग्रेजी  गाने  सुनिए .
•         अपने interest के English program / movies देखिये .
•         अपने  room को  जितना  English बना  सकते  हैं  बनाइये ….English posters, Hollywood actors,English  books,Cds ..जैसे  भी   हो  जितना  भी  हो  make it English.
2. ऐसे लोगों के साथ group बनाएं जो आप ही की तरह स्पोकेन इंग्लिश सीखना चाहते हों : कुछ ऐसे  दोस्त   खोजिये  जो  आप   ही  की  तरह  अंग्रेजी  बोलना सीखना  चाहते  हैं .  अगर  आपके  घर  में  ही  कोई  ऐसा  है  तो  फिर  तो  और  भी  अच्छा  है . लेकिन  अगर  ना  हो  तो  ऐसे  लोगों  को  खोजिये , और  वो  जितना  आपके  घर  के  करीब  हों  उतना अच्छा  है . ऐसे दोस्तों  से  अधिक  से  अधिक  बात  करें  और  सिर्फ  English में . हाँ  ,चाहें  तो  आप  mobile पर  भी  यही  काम  कर  सकते  हैं .
 3. कोई mentor बना लें: किसी ऐसे व्यक्ति को अपना mentor बना लें जो अच्छी English जानता हो, आपका कोई मित्र, आपका कोई रिश्तेदार, कोई पडोसी, कोई अंग्रेजी सीखाने वाला institute ….कोई भी जो आपकी मदद के लिए तैयार हो. आपको अपने मेंटर से जितनी मदद मिल सके लेनी होगी. अगर आप को मेंटर ना मिले तो भी मायूस होने की ज़रुरत नहीं है आप अपने efforts में लगे रहे , मेंटर मिलने सी आपका काम आसानी से होता लेकिन ना मिलने पर भी आप अपने प्रयास से यह भाषा सीख सकते हैं.
 4. पहले  दिन  से  ही correct English बोलने  का  प्रयास  मत  करें : अगर  आप  ऐसा  करेंगे  तो   आप   इसी  बात  में  उलझे  रह  जायेंगे  की  आप  सही  बोल  रहे  हैं  या  गलत . पहला  एक -दो  महिना  बिना  किसी  tension के   जो  मुंह  में  आये  बोले , ये  ना  सोचें  कि  आप  grammatically correct हैं  या  नहीं .  जरूरी  है  कि  आप  धीरे -धीरे  अपनी  झिझक  को  मिटाएं  .
 5. English सीखने के लिए  Alert रहे : वैसे  तो  मैं  अपनी  spoken English का  श्रेय   अपने  school St.Paul’s को  देता हूँ  पर  अंग्रेजी  के लिए  अपनी  alertness की  वजह  से  भी  मैंने  बहुत  कुछ   सीखा  है . मैं  जब  TV पर  कोई  English program देखता  था  तो  ध्यान  देता  था  की  words को  कैसे  pronounce किया  जा रहा  है , और  किसी  word को  sentence में  कैसे  use  किया  जा रहा  है . इसके  आलावा  मैंने  नए  words सीखने  के  लिए  एक  diary भी  बनायीं  थी  जिसमे  मैं  newspaper पढ़ते  वक़्त जो  words नहीं  समझ  आते  थे  वो  लिखता  था , और  उसका use  कर  के एक  sentence भी  बनता  था , इससे  word की  meaning याद  रखने  में  आसानी  होती  थी .
6. बोल  कर  पढ़ें : हर  रोज  आप  अकेले  या  अपने  group में  तेज  आवाज़  में  English का  कोई  article या  story पढ़ें . बोल -बोल  कर   पढने  से  आपका  pronunciation सही  होगा , और  बोलने  में  आत्मविश्वास  भी  बढेगा .
 7. Mirror का use करें  : मैं  English बोलना  तो  जानता  था  पर  मेरे  अन्दर  भी  fluency की  कमी  थी , इसे ठीक  करने  के  लिए  मैं  अक्सर  अकेले  शीशे  के  सामने  खड़े  होकर   English में  बोला  करता  था . और  अभी  भी  अगर  मुझे  कोई  presentation या  interview देना  होता  है  तो  मैं  शीशे   के  सामने  एक -दो  बार  practice  करके  खुद  को  तैयार  करता  हूँ .  आप  भी  अपने  घर  में  मौजूद  mirror का  इस्तेमाल  अपनी  spoken English improve करने  के  लिए  कीजिये .  शीशे  के  सामने  बोलने  का  सबसे  बड़ा  फायदा  है  कि  आप  को  कोई  झिझक  नहीं  होगी  और  आप  खुद  को  improve कर  पाएंगे .
8. Enjoy the process: English बोलना  सीखेने  को  एक  enjoyment की  तरह  देखें  इसे अपने  लिए  बोझ  ना  बनाएं .  आराम  से  आपके  लिए  जो  speed comfortable हो  उस  speed से  आगे  बढें  . पर  इसका  ये  मतलब  नहीं  है  कि  आप  अपने  प्रयत्न  एकदम  से  कम   कर  दें , बल्कि  जब  आप  इसे  enjoy करेंगे  तो  खुद -बखुद  इस  दिशा  में  आपके  efforts और  भी  बढ़  जायेंगे .  आप  ये  भी  सोचें  कि  जब  आप  fluently बोलने  लगेंगे  तब  कितना  अच्छा लगेगा  , आप  का  confidence भी  बढ़  जायेगा  और  आप  सफलता  की  तरफ  बढ़ने  लगेंगे .
 9. English में सोचना शुरू करें : जब  इंसान  मन  में  कुछ  सोचता  है  तो  naturally वो  अपनी  मात्र  भाषा  में  ही  सोचता  है . लेकिन  चूँकि  आप  English सीखने  के  लिए  committed हैं  तो  आप  जो  मन  में  सोचते  हैं  उसे  भी  English में  सोचें . यकीन  जानिये  आपके  ये  छोटे -छोटे  efforts आपको  तेजी  से  आपकी  मंजिल  तक  पंहुचा  देंगे .
10. ऐसी  चीजें   पढ़ें जो समझने में बिलकुल आसान हों: बच्चों की English comics आपकी हेल्प कर सकती है, उसमे दिए गए pictures आपको story समझने  में हेल्प करेंगे और simple sentence formation भी आम बोल चाल में बोले जाने वाले सेंटेंसेस पर आपकी पकड़  बना देंगे.
11. Internet का use करें : आप स्पोकेन इंग्लिश सीखने के लिए इन्टरनेट का भरपूर प्रयोग करें. You Tube पर available  videos आपकी काफी हेल्प कर सकते हैं.  सही pronunciation और meaning के लिए आप TheFreeDictionary.Com का use कर सकते हैं.  AchhiKhabar.Com पर दिए गए Quotes भी आपकी मदद कर सकते हैं, चूँकि मैंने जो quotes collect किये हैं वो English और Hindi दोनों में हैं तो आप वहां से भी कुछ सीख  सकते हैं और साथ ही महापुरुषों के अनमोल विचार भी जान सकते हैं.
12. Interest मत  loose कीजिये : अधिकतर  ऐसा  होता  है  कि  लोग  बड़े  जोशो -जूनून  के  साथ  English सीखना  शुरू  करते  हैं . वो  ज्यादातर  चीजें  करते  हैं  जो  मैंने  ऊपर  बतायीं , पर  दिक्कत  ये  आती  है  कि  हर  कोई  अपनी  comfort zone में  जाना  चाहता  है . आपकी  comfort zone Hindi है  इसलिए  आपको  कुछ  दिनों  बाद  दुबारा  वो  अपनी  तरफ  खींचेगी  और  ऊपर  से  आपका  माहौल  भी  उसी  को  support करेगा . इसलिए  आपको  यहाँ  पर  थोड़ी  हिम्मत  दिखानी  होगी , अपना  interest अपना  enthusiasm बनाये  रखना  होगा .  इसके  लिए  आप  English से  related अपनी  activities में  थोडा  innovation डालिए . For example : यदि  आप  रोज़ -रोज़  serious topics पर  conversation करने से  ऊब  गए  हों  तो  कोई  abstract topic, या  फ़िल्मी   मसाले  पर  बात  करें ,  कोई इंग्लिश मूवी देखने चले जाएँ, या फिर कुछ और करें जो आपके दिमाग में आये.आप  एक -दो  दिन  का  break भी  ले  सकते  हैं , और  नए  जोश  के  साथ  फिर  से  अपने  mission पर  लग  सकते  हैं . पर  कुछ  ना  कुछ  कर  के  अपना  interest बनाये  रखें . वरना  आपका  सारा  effort waste चला  जायेगा .
Bonus Tip : Use your Television
अभी कुछ दिन पहले मैं फरीदाबाद अपने भैया के यहाँ गया था , वहां मेरा 3 साल का भतीजा बड़े मजे से छोटा भीम कार्टून देख रहा था, मैंने notice किया कि चैनल की language English पे सेट है. I think ये एक अच्छा तरीका है इंग्लिश सीखने का, बच्चों के लिए बनाये गए कार्टून्स की भाषा सरल होती है और साथ में चल रहे एनीमेशन से बात को समझना आसान हो जाता है. आप भी इस तरीके का use कर सकते हैं.इसके आलावा आप ऐसे channels भी देख सकते हैं जिसमे subtitles आते हैं. इससे भी आपको भाषा सीखने में मदद मिलेगी.
Friends, English एक universal language है, इसे दुनिया भर में अरबों लोग बोलते हैं, तो आप ही सोचिये जो काम अरबों लोग कर सकते हैं भला आप क्यों नहीं!!! बस इतना याद रखिये कि अंग्रेजी  बोलना सीखने का सबसे सरल तरीका है “अंग्रेजी बोलना”  और इस लिए आपको ऐसे लोगों के साथ अधिक से अधिक  रहना चाहिए जिनसे आप इंग्लिश में बात कर सकते हैं. अपनी झिझक मिटाइए और ऐसे हर एक मौके का फायदा उठाइए जहाँ आपको English बोलने का मौका मिल रहा हो.
तो फिर देर किस बात की है बस लग जाइये अपने efforts में और अपने भाषा ज्ञान में अंग्रेजी भी जोड़ लीजिये.All the best! :)
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निवेदन : यदि आप के पास अंग्रेजी बोलना सीखने से सम्बंधित कोई और idea हो तो कृपया उसे अपने comments के माध्यम से हमारे साथ शेयर करें. Your idea can change somebody’s life.
निवेदन : यदि  यह  लेख  आपके लिए लाभप्रद रहा हो तो कृपया  कृपया  comment के  माध्यम  से  मुझे बताएं.और इसे अपने Facebook friends  के साथ ज़रूर share करें .

Thursday, January 30, 2014

हरियाणा सरकार में 8672 पदों पर भर्तियां


हरियाणा सरकार में कई पदों पर भर्तियां निकली हैं. रिक्तियों को भरने के लिए हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन कमीशन ने क्लर्क, स्टेनो टाइपिस्ट, जूनियर स्टेनोग्राफर, सीनियर स्टेनोग्राफर, ड्राइवर पद पर भर्तियां निकाली हैं.

 रिक्त पद व उनकी संख्या-

 क्लर्क - 6783
 स्टेनो टाइपिस्ट (हिंदी)- 297
 स्टेनो टाइपिस्ट (इंग्लिश) - 349
 स्टेनो टाइपिस्ट (हिंदी व इंग्लिश दोनों भाषा) - 311
 जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर (इंग्लिश) - 23
 जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर (हिंदी) - 12
 जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर (हिंदी व इंग्लिश दोनों भाषा) - 54
 सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर (इंग्लिश) - 13
 सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर (हिंदी) - 02
 सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर (हिंदी व इंग्लिश दोनों भाषा) - 54
 ड्राइवर (लाइट ट्रांसपोर्ट व्हीकल) - 379
 ड्राइवर (हेवी ट्रांसपोर्ट व्हीकल) - 341
 ट्रैक्टर ड्राइवर - 13
 हरियाणा राज्य सैनिक बोर्ड के लिए ड्राइवर - 06


 योग्यता
 इन पदों के लिए आयु सीमा 40 वर्ष रखी गई है. हरियाणा राज्य सैनिक बोर्ड में ड्राइवर पद के लिए 25 से 50 वर्ष तक की आयु के उम्मीदवार एप्लाई कर सकते हैं. क्लर्क पद के लिए प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण 12वीं पास युवा या ग्रेजुएट एप्लाई कर सकते हैं. उनका 10वीं तक हिंदी या संस्कृत विषय पढ़ा होना भी जरूरी है. स्टेनो संबंधी पद के लिए भी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण 12वीं पास युवा या ग्रेजुएट एप्लाई कर सकते हैं. लेकिन स्टेनो संबंधी पद पर एप्लाई करने के लिए उनको अच्छी स्पीड में शॉर्टहैंड आनी जरूरी है.

 कैसे करें आवेदन
 उम्मीदवार केवल ऑनलाइन मोड से ही एप्लाई कर सकते हैं. आवेदन करने की अंतिम तिथि 19 फरवरी, 2014 है. आवेदन संबंधी अधिक जानकारी के लिए हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन कमिशन की वेबसाइट ( http://onlinehssc.in/ ) पर जा सकते है.

ईएसआईसी में 267 पदों पर निकली वैकेंसी और भीl


   कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) में सोशल सिक्योरिटी असिस्टेंट के 267 पदों पर वैकेंसी निकली हैं. 267 में से 150 पद अनारक्षित हैं. एससी वर्ग के लिए 44, एसटी के लिए 03, ओबीसी के लिए 70 पद आरक्षित हैं. सोशल सिक्योरिटी असिस्टेंट के पद के लिए 4600 रुपये के ग्रेड-पे के साथ 9300-34800 रुपये वेतमान तय किया गया है. योग्यता
किसी भी विषय से ग्रेजुएट इन भर्तियों के लिए एप्लाई कर सकता है. बस उसका मान्यता प्राप्त संस्थान से ग्रेजुएट होना जरूरी है. कॉमर्स, लॉ और मैनेजमेंट साइड से ग्रेजुएशन करने वाले युवाओं को चयन के दौरान प्राथमिकता दी जाएगी. इसके अलावा उम्मीदवार को कंप्यूटर का ज्ञान भी होना चाहिए. उसे पता होना चाहिए कि ऑफिस के डाटबेस के संदर्भ में कंप्यूटर का इस्तेमाल कैसे किया जाता है.
इन भर्तियों में केवल वही युवा एप्लाई कर सकते हैं जिनकी उम्र 21 से 27 साल के बीच है. आयु की गणना 20 फरवरी, 2014 से की जाएगी. आरक्षित वर्ग को नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी की गई है.
कैसे होगा सेलेक्शन
ये एक डायरेक्ट रिक्रूटमेंट है. नौकरी हासिल करने के लिए उम्मीदवारों को तीन परीक्षाएं देनी होंगी - लिखित, कंप्यूटर स्किल टेस्ट और इंटरव्यू. इन तीनों में परफॉर्मेंस के आधार पर ही उम्मीदवारों का चयन होगा. 80 फीसदी नंबर लिखित और कंप्यूटर स्किल टेस्ट से दिए जाएंगे. बाकी 20 फीसदी इंटरव्यू से.
कैसे करें आवेदन
उम्मीदवार केवल ऑनलाइन मोड से ही एप्लाई कर सकते हैं. अनारक्षित उम्मीदवारो को बतौर एग्जामिनेशन फीस 275 रुपये अदा करने होंगे. इस फीस का भुगतान एसबीआई बैंक में चलान भरकर किया जा सकता है. एससी, एसटी और महिला उम्मीदवारों को कोई फीस नहीं देनी होगी. आवेदन की अंतिम तिथि 20 फरवरी, 2014 है. आवेदन और उससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए ईएसआईसी की वेबसाइट ( https://www.jobapply.in/esi2013/ ) पर जा सकते है.

Tuesday, January 28, 2014

फेसबुक पर हुआ प्‍यार, अमेरिका की पार्टी गर्ल भारत में बना रही है गोबर के कंडे


अपनी ऐशो-आराम भरी जिंदगी छोड़कर अमेरिका की एक महिला भारत के एक गांव में अपने पति के साथ सीधी-सादी जिंदगी गुजार रही है. जी हां, यहां हम 41 वर्षीय एड्रियाना पेरल की बात कर रहे हैं, जो पिछले साल अगस्‍त में उस लड़के से मिलने कैलिफोर्निया से भारत आ पहुंची, जिससे उसकी मुलाकात फेसबुक के जरिए हुई थी. फेसबुक पर ही दोनों की दोस्‍ती परवान चढ़ी.

भारत आने के दो महीने बाद एड्रियाना ने अपने 25 वर्षीय प्रेमी मुकेश कुमार से ब्‍याह रचा लिया. एड्रियाना ने सिर्फ शादी ही नहीं की बल्कि वो मुकेश के परिवार में पूरी तरह रच बस गई हैं. हरियाणा के पानीपत के छोटे से गांव में एड्रियान बिलकुल उसी तरह से रह रही हैं जैसे बाकी के गांव वाले रहते हैं.

कैलिफोर्निया में अपने दोस्‍तों के साथ पार्टी करने वाली, बेटी लूसी के साथ खूब शॉपिंग करने वाली और जिम जाने वाली एड्रियाना अब अपने ससुराल में झाड़ू लगाती हैं, खाना बनाती है और खेतों में भी काम करती हैं.
जिंदगी में आए इस बड़े बदलाव से एड्रियाना बेहद खुश हैं. कैलिफोर्निया के एक एक्‍यूपंक्‍चर सेंटर में बतौर रिसेप्‍शनिस्‍ट काम कर चुकीं एड्रियाना कहती हैं, 'मुझे यहां मुकेश के साथ बहुत अच्‍छा लग रहा है. मैं इसके बदले दुनिया की कोई भी चीज कुर्बान कर सकती हूं'.
एड्रियाना कहती हैं कि अमेरिका में उनके कई सारे अफेयर रहे हैं, लेकिन उन्‍हें कभी सच्‍चा प्‍यार नहीं मिला. उन्‍होंने पिछले साल फरवरी में अपने से 16 साल छोटे मुकेश से फेसबुक के जरिए बातचीत करनी शुरू की. धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए और एक शाम मुकेश का फोन आया.
एड्रियाना कहती हैं, 'फोन पर ही मुकेश ने अपने प्‍यार का इजहार किया. मुझे मालूम नहीं था कि मैं कैसे प्रतिक्रिया दूं और पहले तो मैं बस हंस पड़ी. लेकिन जब हमने थोड़ी और बात की तो मुझे एहसास हुआ कि वह रिश्‍ते को लेकर गंभीर है. मैंने उससे कहा कि अगर वह मेरा दिल जीत लेगा तो मैं उससे शादी कर लूंगी. इसके बाद हमने तीन और हफ्तों तक बातचीत की और उसी दौरान मैंने तय कर लिया कि मुझे मुकेश के साथ रहना और मैं भारत जाने के लिए तैयार हूं'.

मुकेश से मिलने के लिए एड्रियाना को अपनी 25 साल की बेटी लूसी को अमेरिका में ही छोड़कर आना पड़ा. एड्रियाना के मुताबिक, 'जब मैंने लोगों को बताया कि मैं भारत जा रही हूं तो वे हैरान रह गए. मेरी बेटी रो रही थी. उसे चिंता सता रही थी कि कहीं मेरे साथ कुछ गलत ना हो जाए. उसका कहना था कि भारत महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है और फिर मुझे उसे समझाना पड़ा'.
'कुछ लोग कहते थे कि मुकेश फर्जी है और वह वाकई में है ही नहीं. मैं बता नहीं सकती कि जब मैंने उसको पहली दिल्‍ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट के बाहर देखा तो मुझे कैसा लगा'.
एड्रियाना के लिए भारत के छोटे से गांव में रहन आसान नहीं था. घर के अंदर ना तो टॉयलेट हैऔर ना ही दूसरी मूलभेत सुविधाएं. उन्‍होंने कहा, 'जब मैं पहली बार घर के अंदर दाखिल हुई तो हैरान रह गई. यहां लड़कियों पर ज्‍यादा पाबंदी है. महिलाओं को अपने तन को अच्‍छी तरह ढक कर रखना होता है. हम चूल्‍हे पर खाना बनाते हैं. हम बैल गाड़ी का इस्‍तेमाल करते हैं. अगर मेरे घरवालों को पता चल जाए कि मैं कैसे रह रही हूं तो वे समझेंगे कि मैं पागल हो गई हूं. शुरुआत में तो बहुत दिक्‍कत आई, लेकिन मुझे जल्‍द ही एहसास हो गया कि खुश रहने के लिए फैन्‍सी टॉयलेट या शावर की जरूरत नहीं'.

एड्रियाना कहती हैं कि उन्‍हें गांववालों ने दिल से स्‍वीकार किया है. उनके मुताबिक, 'पहले तो वे मुझे किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं समझते थे, लेकिन अब अपने जैसा ही मानते हैं. अब मैं उन्‍हीं के जैसे तैयार होती हूं और थोड़ी-थोड़ी हिंदी भी बोल लेती हूं'.
मुकेश और एड्रियाना की शादी नवंबर 2013 में पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ हुई. मुकेश टूटी-फूटी अंग्रेजी बोल लेते हैं और उनका कहना है, 'एड्रियाना एक अच्‍छी पत्‍नी हैं'. वो हमेशा घर के कामों में लगी रहती हैं और जब मेरी मां बर्तन धोती है वो कहती हैं, 'नहीं मैं करूंगी. ये मेरा काम है'. मैं एड्रियाना के साथ घर बसाकर बेहद खुश हूं. यह सच्‍चा प्‍यार है'.
अब दोनों अपना परिवार बढ़ाना चाहते हैं. हालांकि एड्रियाना वापस अमेरिका जाने की बात से इनकार नहीं करती हैं. उनका कहना है, 'मैं मुकेश के साथ अपना परिवार बढ़ाना चाहती हूं और मेरी सास तो चाहती हैं कि हमारे दो बच्‍चे हों. मैं यहां थोड़ा अमेरिका खाना और सुख-सुविधाएं लाना चाहती हूं. लेकिन एक दिन हम अपने परिवार के साथ अमेरिका वापस जाना चाहेंगे. भारत के लोग बहुत स्‍नेही हैं और यह मेरा दूसरा घर है'.


Monday, January 27, 2014

Pnb Jobs india

Punjab National Bank has invited applications for the posts of managers in MMG Scale II and officers in JMG Scale I in various disciplines. Interested and eligible candidates can apply for the openings on the bankâ??s official website - www.pnbindia.in - before February 11, 2014.

Vacancy details:


Total number of posts: 82

Name and number of posts:

1.    Manager (Security) MMG Scale II: 26

2.    Manager (Civil Engineer) MMG Scale II: 04

3.    Manager (Mechanical Engineer) MMG Scale II: 01

4.    Manager (Architect) MMG Scale II: 02

5.    Manager (Financial Analysts) MMG Scale II: 05

6.    Manager (Industry)-Civil MMG Scale II: 05

7.    Manager (Industry) - Chemical MMG Scale II: 05

8.    Manager (Industry) â?? Electrical MMG Scale II: 05

9.    Manager (Industry) - Mechanical MMG Scale II: 05

10.    Manager (Industry) - Textile MMG Scale II: 05

11.    Manager (Industry) - Electronics & Telecommunication MMG Scale II: 03

12.    Manager (Industry) - Computer Science / IT MMG Scale II: 02

13.    Officer (Civil Engineer) JMG Scale I: 08

14.    Officer (Electrical Engineer) JMG Scale I: 03

15.    Officer (Mechanical Engineer) JMG Scale I: 01

16.    Officer (Printing Technologist) JMG Scale I: 02

Application fee:


Applicants from SC/ST/PWD category and others are required to pay a non-refundable application fee of Rs 50 and Rs 400 respectively.

Eligibility criteria:

For eligibility details interested candidates can have a look at the detailed notification in PNBâ??s official website: www.pnbindia.in

Selection procedure:

The candidates will be selected on the basis of their performance in written test (online) and/or personal interview.

How to apply:

Eligible candidates are required to apply online through the bankâ??s official website: www.pnbindia.in between 28 January 2014 and 11 February 2014. No other means/modes of applications will be accepted.

Important dates:

Opening date for online registration: 28 January 2014

Closing date for online registration: 11 February 2014

Tentative date of written examination: 23 March 2014

Downloading of call letters for written test: 10 March 2014

दोहा

दोहा 
श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि I
बरनऊ रघुबर विमल जसु, जो दायक फल चारि II
बुद्धिहीन तनु जानिके , सुमरो पवन -कुमार I 
बल बुद्धि विद्या देहु मोहे , हरहु कलेश विकार II
चोपाई
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर I जय कपीस तिहुँ लोक उजागर II
राम दूत अतुलित बल धामा I अंजनी पुत्र पवन सूत नामा II
महाबीर बिक्रम बजरंगी I कुमति निवार सुमति के संगी II
कंचन बरन बिराज सुबेषा I कानन कुंडल कुंचित केशा II
हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजे I कांधे मूँज जनेऊ साजे II
शंकर सुवन केसरीनंदन I तेज प्रताप महा जग बंधन II
विद्यावान गुणी अति चातुर I राम काज करिवे को आतुर II
प्रभु चरित सुनिवे को रसिया I राम लखन सीता मन बसिया II
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा I विकत रूप धरि लंक जरावा II
भीम रूप धरि असुर संहारे I रामचंद्र के काज संवारे II
लाये संजीवन लखन जियाये I श्रीरघुवीर हरिष उर लाये II
रघुपतिi किन्ही बहुत बड़ाई I तुम मम प्रिय भरत सम भाई II
सहस बदन तुम्हारो जस गावें I आस कहीं श्रीपति कंठ लगावें II
सनकादिक ब्रह्मादी मुनीशा I नारद शरद सहित अहिशा II
जम कुबेर दिगपाल जहाँते Iकवि कोविद कहिं सकें कहाँतें II
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा I राम मिलाये राज पद दीन्हा II
तुम्हरो मंत्र विभीषण मन I लंकेश्वर भये सब जग जाना II
जुग सहस्त्र जोजन पर भानु I लील्यो ताहि मधुर फल जानू II
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि I जलधि लांघी गए अचरज नाहिं II
दुर्गम काज जगत के जेते I सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते II
राम दुआरे तुम रखवारे I होत न आज्ञा बिनु पैसारे II
सब सुख लहैं तुम्हरी शरना I तुम रक्षक काहू को डरना II
आपन तेज सम्हारो आपै I तीनो लोक हाकते कापें II
भूत पिशाच निकट नहीं आवै I महावीर जब नाम सुनावै II
नाशै रोग हरे सब पीरा I जपत निरंतर हनुमत वीरा II
संकट ते हनुमान छुड़ावै I मन क्रम बचन ध्यान जो लावै II
सब पर राम तपस्वी रजा I तिन के काज सकल तुम सजा II
और मनोरथ जो कोई लावै I सौई अमित जीवन फल पावै II
चारो जुग प्रताप तुम्हारा I है प्रसिद्द जगत उजियारा II
साधू संत के तुम रखवारे I असुर निकन्दन राम दुलारे II
अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता I अस बार दीन जानकी माता II
राम रसायन तुम्हारे पासा I सदा रहो रघुपति के दासा II
तुम्हरे भजन राम को पावै I जनम जनम के दुःख बिसरावे II
अंत काल रघुबर पुर जाई I जहाँ जनम हरी भक्त कहाई II
और देवता चित्त न धरई I हनुमत सोयी सर्व सुख करई II
संकट कटे मिटे सब पीरा I जो सुमरे हनुमत बलवीरा II
जै जै जै हनुमान गोंसाई I कृपा करहू गुरु देव की नाईं II
जो सत बार पाठ करे कोई I छूटे बन्दी महा सुख होई II
जो यह पड़े हनुमान चालीसा I होय सिद्धि साखी गोरिसा II
तुलसीदास सदा हरि चेरा I कीजे नाथ ह्रदय मैं डेरा II
दोहा
पवन तनय संकट हरण , मंगल मूर्ति रूप I
राम लखन सीता सहीत , ह्रदय बसहु सुर भूप II

अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए तो मुस्लिम भी करेंगे तरक्की

योगगुरु बाबा रामदेव ने नरेंद्र मोदी को मुस्लिमों के शत्रु के तौर पर पेश करने के लिए राजनैतिक दलों पर हमला बोला और दावा किया कि उनके नेतृत्व में बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक दोनों समुदाय प्रगति करेंगे.
रामदेव ने राजनैतिक दलों का नाम लिए बिना यहां कहा, 'कुछ राजनैतिक दल, जो वोट बैंक के रूप में मुस्लिमों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे मोदी को उनके शत्रु के तौर पर पेश कर समुदाय को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं. ये पार्टियां ये बात फैला रही हैं कि अगर मोदी प्रधानमंत्री बने तो मुस्लिमों को अन्याय का सामना करना पड़ेगा.'
योगगुरु ने प्रधानमंत्री पद के बीजेपी के उम्मीदवार को अपना सशर्त समर्थन दिया है. उन्होंने कहा कि मोदी में नेतृत्व के गुण हैं और उनकी मंशा देश को विकसित करने की है. उन्होंने कहा, 'इसलिए अगर मोदी प्रधानमंत्री बने तो मुस्लिम अपने हिंदू भाइयों के साथ आगे बढ़ेंगे. जो पार्टियां मुस्लिमों को अपने वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल कर रही हैं वे इस बार अपने दुष्प्रचार में सफल नहीं होंगी.'
उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए. उन्हें रोजगार, सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार और अच्छी शिक्षा की आवश्यकता है और यह तभी हो सकता है जब भारत में यूरोप और अमेरिका से बेहतर विश्वविद्यालय हों.
रामदेव ने कहा, 'देश में 20 करोड़ नए रोजगार पैदा करने का अवसर हैं. हालांकि, वैसा होने के लिए हमें सक्षम प्रशासन और मजबूत नेता की जरूरत है.' रामदेव ने कहा कि वह 23 मार्च को योग महोत्सव का आयोजन करेंगे, जिसमें देशभर से 10 करोड़ से अधिक लोग भागीदारी करेंगे.
रामदेव ने बताया कि दिल्ली में उनके साथ 10 लाख से अधिक लोग योग करेंगे. उन्होंने कहा कि इस बड़े कार्यक्रम का लक्ष्य आगामी लोकसभा चुनाव के लिए मोदी और उनकी पार्टी के लिए जन समर्थन जुटाना है. रामदेव ने कहा, 'मोदी काला धन, भ्रष्टाचार और मौजूदा व्यवस्था में बदलाव के मुद्दों पर हमसे सहमत हैं. इसलिए, हम उनका समर्थन कर रहे हैं.'
रामदेव ने केजरीवाल पर निशाना साधा
योगगुरु बाबा रामदेव ने रविवार को आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा. बाबा ने आरोप लगाया कि उनकी कथनी और करनी में अंतर है.
रामदेव ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, 'मेरा मानना है कि लोगों को केजरीवाल से काफी अपेक्षाएं हैं कि वह कुछ अच्छा करेंगे और राजनीति में सुधार करेंगे, लेकिन लोग अब इस पार्टी को अराजक आदमी पार्टी कह रहे हैं.'
रामदेव ने कहा, 'वह (केजरीवाल) अन्य राजनैतिक दलों पर कथनी और करनी में अंतर होने का आरोप लगाते थे. अन्य पार्टियों के स्वेच्छाचारी होने में 60 साल लगे, लेकिन 'आप' खुद पर नियंत्रण करने की स्थिति में नहीं लगती है. राजनैतिक बदलाव का मतलब यह नहीं है कि आप जो प्रवचन देते हैं और 'आप' जो करते हैं उसमें अंतर हो.
रामदेव ने कहा, 'अगर वह (केजरीवाल) सही दिशा में बढ़ते हैं तो वह उम्मीद के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे, जो उन्होंने देश में जगाई है, लेकिन हाल में उन्होंने जो कुछ भी किया है (दिल्ली में प्रदर्शन करना) उससे उनकी लोकप्रियता 100 फीसदी से घटकर 10 फीसदी पर आ गई है.'

ESIC में ढाई सौ से ज्यादा भर्तियों की निकली वैकेंसी...


कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) में सोशल सिक्योरिटी असिस्टेंट के 267 पदों पर वैकेंसी निकली हैं. 267 में से 150 पद अनारक्षित हैं. एससी वर्ग के लिए 44, एसटी के लिए 03, ओबीसी के लिए 70 पद आरक्षित हैं. सोशल सिक्योरिटी असिस्टेंट के पद के लिए 4600 रुपये के ग्रेड-पे के साथ 9300-34800 रुपये वेतमान तय किया गया है. योग्यता
किसी भी विषय से ग्रेजुएट इन भर्तियों के लिए एप्लाई कर सकता है. बस उसका मान्यता प्राप्त संस्थान से ग्रेजुएट होना जरूरी है. कॉमर्स, लॉ और मैनेजमेंट साइड से ग्रेजुएशन करने वाले युवाओं को चयन के दौरान प्राथमिकता दी जाएगी. इसके अलावा उम्मीदवार को कंप्यूटर का ज्ञान भी होना चाहिए. उसे पता होना चाहिए कि ऑफिस के डाटबेस के संदर्भ में कंप्यूटर का इस्तेमाल कैसे किया जाता है.
इन भर्तियों में केवल वही युवा एप्लाई कर सकते हैं जिनकी उम्र 21 से 27 साल के बीच है. आयु की गणना 20 फरवरी, 2014 से की जाएगी. आरक्षित वर्ग को नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी की गई है.
कैसे होगा सेलेक्शन
ये एक डायरेक्ट रिक्रूटमेंट है. नौकरी हासिल करने के लिए उम्मीदवारों को तीन परीक्षाएं देनी होंगी - लिखित, कंप्यूटर स्किल टेस्ट और इंटरव्यू. इन तीनों में परफॉर्मेंस के आधार पर ही उम्मीदवारों का चयन होगा. 80 फीसदी नंबर लिखित और कंप्यूटर स्किल टेस्ट से दिए जाएंगे. बाकी 20 फीसदी इंटरव्यू से.
कैसे करें आवेदन
उम्मीदवार केवल ऑनलाइन मोड से ही एप्लाई कर सकते हैं. अनारक्षित उम्मीदवारो को बतौर एग्जामिनेशन फीस 275 रुपये अदा करने होंगे. इस फीस का भुगतान एसबीआई बैंक में चलान भरकर किया जा सकता है. एससी, एसटी और महिला उम्मीदवारों को कोई फीस नहीं देनी होगी. आवेदन की अंतिम तिथि 20 फरवरी, 2014 है. आवेदन और उससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए ईएसआईसी की वेबसाइट ( https://www.jobapply.in/esi2013/ ) पर जा सकते है.

Wednesday, January 22, 2014

एक माँ चटाई पे लेटी आराम से सो रही थी...

क माँ चटाई पे लेटी आराम से सो रही थी...
कोई स्वप्न सरिता उसका मन भिगो रही थी...
तभी उसका बच्चा यूँ ही गुनगुनाते हुए आया...
माँ के पैरों को छूकर हल्के हल्के से हिलाया...
माँ उनीदी सी चटाई से बस थोड़ा उठी ही थी...
तभी उस नन्हे ने हलवा खाने की ज़िद कर दी...
माँ ने उसे पुचकारा और फिर गोद मेले लिया...
फिर पास ही ईंटों से बने चूल्हे का रुख़ किया...
फिर उनने चूल्हे पे एक छोटी सी कढ़ाई रख दी...
फिर आग जला कर कुछ देर उसे तकती रही...
फिर बोली बेटा जब तक उबल रहा है ये पानी...
क्या सुनोगे तब तक कोई परियों वाली कहानी...
मुन्ने की आँखें अचानक खुशी से थी खिल गयी...
जैसे उसको कोई मुँह माँगी मुराद हो मिल गयी...
माँ उबलते हुए पानी मे कल्छी ही चलाती रही...
परियों का कोई किस्सा मुन्ने को सुनाती रही...
फिर वो बच्चा उन परियों मे ही जैसे खो गया....
सामने बैठे बैठे ही लेटा और फिर वही सो गया...
फिर माँ ने उसे गोद मे ले लिया और मुस्काई...
फिर पता नहीं जाने क्यूँ उनकी आँख भर आई...
जैसा दिख रहा था वहाँ पर सब वैसा नही था...
घर मे इक रोटी की खातिर भी पैसा नही था...
राशन के डिब्बों मे तो बस सन्नाटा पसरा था...
कुछ बनाने के लिए घर मे कहाँ कुछ धरा था...
न जाने कब से घर मे चूल्हा ही नहीं जला था...
चूल्हा भी तो बेचारा माँ के आँसुओं से गला था...
फिर उस बेचारे को वो हलवा कहाँ से खिलाती...
उस जिगर के टुकड़े को रोता भी कैसे देख पाती...
वो मजबूरी उस नन्हे मन को माँ कैसे समझाती...
या फिर फालतू मे ही मुन्ने पर क्यूँ झुंझलाती...
इसलिए हलवे की बात वो कहानी मे टालती रही...
जब तक वो सोया नही, बस पानी उबालती रही..

Tuesday, January 21, 2014

इनके जज्बे के आगे आसमान भी झुकता है ... शत शत नमन

इनके जज्बे के आगे आसमान भी झुकता है ... शत शत नमन

ग्लोसबी - एक नया, शानदार अंग्रेज़ी-हिंदी ऑनलाइन शब्दकोश

ग्लोसबी - एक नया, शानदार अंग्रेज़ी-हिंदी ऑनलाइन शब्दकोश

ऑनलाइन अंग्रेज़ी-हिंदी शब्दकोशों की भीड़ में एक और शब्दकोश?
इसमें नया क्या है?
तो, पहले तो इसके डेवलपरों का स्वकथन ही देख लें -
"We are working to provide the best online dictionary ever, covering all major languages...."

सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ ऑनलाइन शब्दकोश...
चलिए थोड़ी जांच परख करते हैं -
यह चित्र देखें जो season का हिंदी अर्थ बताने के लिए जेनरेट हुआ है -
image
आप भी चाहें तो इस लिंक पर इसे देख सकते हैं -
http://glosbe.com/en/hi?q=season
हुम्म... दिख तो बड़ा अच्छा रहा है... नीचे और स्क्रॉल करेंगे तो शब्द के उपयोग के उदाहरण भी मिलेंगे. पब्लिक डोमेन में उपलब्ध ट्रांसलेशन मेमोरी से ली गई सामग्री (जैसे कि केडीई डेस्कटॉप वातावरण के लिए किए गए मेरे अंग्रेज़ी-हिंदी अनुवाद) भी यहाँ है, जो इसे समग्र बनाने में सहायक है, और एक हद तक डेवलपरों के दावे को सही ठहराता है.
आपका क्या अनुभव है?

पागल थे नाथूराम गोडसे।

पागल थे नाथूराम गोडसे।
क्यूंकि उसने उस गाँधी को मारा
जिस गाँधी ने भगतसिंह की फांसी पर कोई
विरोध प्रकट नहीं किया.....

जिस गाँधी ने जलियांवाला हत्याकांड के
दोषी जनरल डायर की सजा के लिए कोई
भी आन्दोलन नहीं किया.....

जिस गाँधी ने अपने चहेते नेहरु
को प्रधानमंत्री बनाने के लिए देश के 2 बटवारे
करा दिए......

जिस गाँधी के 5 संतान होते हुए भी कई अवैध
सम्बन्ध थे......
जिस गाँधी भारतीयों की सशत्रक्रांति मे
तो हिंसा दिखती थी मगर अंग्रेजो के दमन चक्र मे
अहिंसा....

जो गाँधी 50 साल की उम्र मे 18 साल
की लड़की से
शादी करना चाहता था जिसका खुलासा खुद
गाँधी के पुत्र ने किया.....

ऐसे संत और महान देशभक्त को मारना देश से
गद्दारी नहीं तो क्या है.....

पागल था गोडसे जो भारतका विस्तार सिन्धु
नदी तक चाहता था !
और लोग भी तो जी रहे थे.जी लेता तो आज तक
मरने के बाद भी अपमानित नहीं होता. हर साल
लोगो के अपशब्द नहीं सुनता.
अरे इस देश मे नेताजी बोस जैसो की कोई खैर-खबर
नहीं लेता. तो तुम क्या चीज हो-
जो देशवासी और कांग्रेसी सुखदेव, भगत सिंह और
राजगुरु को आंतकी कहते है वो तुम्हे क्या समझते है
समझ लेना!

ये देश जैसा था वैसा ही है और ऐसा ही रहेगा.
क्युकी यहाँ जागे हुए लोग कम है. और जिन्दा मुर्दे
भरे पड़े है ...! जिन्दा मुर्दे..!

साहब-ठेकेदार संवाद..

संवाद 1

"साहब, एक धांसू स्कीम लाया हूँ"
"..."

"अपने पास जो पनडुब्बी है न, उसके रेनोवेशन, अपग्रेडेशन का एस्टीमेट बनाते हैं..."
"..."

"एस्टीमेट पनडुब्बी की कीमत से भी ज्यादा बनाते हैं, पर आप पास करवा कर वर्क आर्डर करवा देना"
"..."

"फिर हम उस पनडुब्बी को अपने पास दो-चार महीने के लिए रख लेंगे, कुछ ऊपरी रंग-रोगन कर देंगे.."
"..."

"और आपको वापस डिलीवर कर देंगे"
"..."

"आप ऊपरी वेरिफिकेशन कर बिल पास करवा देना..."
"..."

"जब बिल पास हो जाए, और डिटेल वेरिफिकेशन से पहले और वर्करों से कम्प्लेन आने से पहले पनडुब्बी का काम तमाम कर देंगे..."
"वाह! वाह!! क्या धांसू स्कीम लाए हो यार! अभी के अभी प्रपोजल लाओ!!! हम आज के आज सेंक्शन करवाते हैं.. समझो प्लान एक्जीक्यूट हो गया!!!!"
--
संवाद 2
"साहब, एक धांसू स्कीम लाया हूं..."
"..."
"जमीन का एक टुकड़ा है. भाव एकदम हीरा. जंगल का है - वही पर्यावरण. तो उसे हमारे साथी के एनजीओ को 1 रूपए में सोशल कॉज के लिए अलॉट करवा दें"
"..."
"डर्ट सेटल हो जाने के बाद इसकी यूटीलिटी कमर्शियल में बदलवा लेंगे.."
"वाह! वाह!!! क्या स्कीम लाए हो यार!! समझो हो गया!!!"

संवाद 3
"साहब, एक धांसू स्कीम लाया हूं..."
"..."
"कुछ खदानें हैं हमारे आदमियों को बांट देते हैं..."
"..."
"जब हो हल्ला मचेगा तब फ़ाइलों को ग़ायब करवा देंगे - न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी..."
"वाह! वाह!! क्या शानदार स्कीम लाए हो! समझो हो गया!!!"

--

ऐसे संवाद अंतहीन हैं. कितना लिखेंगे, कितना बताएंगे?
आपके पास अलग किस्म का संवाद है? अरे! तब तो हमें जरूर बताओ भाई! कमेंट बॉक्स किसलिए है?संवाद 1

"साहब, एक धांसू स्कीम लाया हूँ"
"..."

"अपने पास जो पनडुब्बी है न, उसके रेनोवेशन, अपग्रेडेशन का एस्टीमेट बनाते हैं..."
"..."

"एस्टीमेट पनडुब्बी की कीमत से भी ज्यादा बनाते हैं, पर आप पास करवा कर वर्क आर्डर करवा देना"
"..."

"फिर हम उस पनडुब्बी को अपने पास दो-चार महीने के लिए रख लेंगे, कुछ ऊपरी रंग-रोगन कर देंगे.."
"..."

"और आपको वापस डिलीवर कर देंगे"
"..."

"आप ऊपरी वेरिफिकेशन कर बिल पास करवा देना..."
"..."

"जब बिल पास हो जाए, और डिटेल वेरिफिकेशन से पहले और वर्करों से कम्प्लेन आने से पहले पनडुब्बी का काम तमाम कर देंगे..."
"वाह! वाह!! क्या धांसू स्कीम लाए हो यार! अभी के अभी प्रपोजल लाओ!!! हम आज के आज सेंक्शन करवाते हैं.. समझो प्लान एक्जीक्यूट हो गया!!!!"
--
संवाद 2
"साहब, एक धांसू स्कीम लाया हूं..."
"..."
"जमीन का एक टुकड़ा है. भाव एकदम हीरा. जंगल का है - वही पर्यावरण. तो उसे हमारे साथी के एनजीओ को 1 रूपए में सोशल कॉज के लिए अलॉट करवा दें"
"..."
"डर्ट सेटल हो जाने के बाद इसकी यूटीलिटी कमर्शियल में बदलवा लेंगे.."
"वाह! वाह!!! क्या स्कीम लाए हो यार!! समझो हो गया!!!"

संवाद 3
"साहब, एक धांसू स्कीम लाया हूं..."
"..."
"कुछ खदानें हैं हमारे आदमियों को बांट देते हैं..."
"..."
"जब हो हल्ला मचेगा तब फ़ाइलों को ग़ायब करवा देंगे - न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी..."
"वाह! वाह!! क्या शानदार स्कीम लाए हो! समझो हो गया!!!"

--

ऐसे संवाद अंतहीन हैं. कितना लिखेंगे, कितना बताएंगे?
आपके पास अलग किस्म का संवाद है? अरे! तब तो हमें जरूर बताओ भाई! कमेंट बॉक्स किसलिए है?संवाद 1

"साहब, एक धांसू स्कीम लाया हूँ"
"..."

"अपने पास जो पनडुब्बी है न, उसके रेनोवेशन, अपग्रेडेशन का एस्टीमेट बनाते हैं..."
"..."

"एस्टीमेट पनडुब्बी की कीमत से भी ज्यादा बनाते हैं, पर आप पास करवा कर वर्क आर्डर करवा देना"
"..."

"फिर हम उस पनडुब्बी को अपने पास दो-चार महीने के लिए रख लेंगे, कुछ ऊपरी रंग-रोगन कर देंगे.."
"..."

"और आपको वापस डिलीवर कर देंगे"
"..."

"आप ऊपरी वेरिफिकेशन कर बिल पास करवा देना..."
"..."

"जब बिल पास हो जाए, और डिटेल वेरिफिकेशन से पहले और वर्करों से कम्प्लेन आने से पहले पनडुब्बी का काम तमाम कर देंगे..."
"वाह! वाह!! क्या धांसू स्कीम लाए हो यार! अभी के अभी प्रपोजल लाओ!!! हम आज के आज सेंक्शन करवाते हैं.. समझो प्लान एक्जीक्यूट हो गया!!!!"
--
संवाद 2
"साहब, एक धांसू स्कीम लाया हूं..."
"..."
"जमीन का एक टुकड़ा है. भाव एकदम हीरा. जंगल का है - वही पर्यावरण. तो उसे हमारे साथी के एनजीओ को 1 रूपए में सोशल कॉज के लिए अलॉट करवा दें"
"..."
"डर्ट सेटल हो जाने के बाद इसकी यूटीलिटी कमर्शियल में बदलवा लेंगे.."
"वाह! वाह!!! क्या स्कीम लाए हो यार!! समझो हो गया!!!"

संवाद 3
"साहब, एक धांसू स्कीम लाया हूं..."
"..."
"कुछ खदानें हैं हमारे आदमियों को बांट देते हैं..."
"..."
"जब हो हल्ला मचेगा तब फ़ाइलों को ग़ायब करवा देंगे - न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी..."
"वाह! वाह!! क्या शानदार स्कीम लाए हो! समझो हो गया!!!"

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ऐसे संवाद अंतहीन हैं. कितना लिखेंगे, कितना बताएंगे?
आपके पास अलग किस्म का संवाद है? अरे! तब तो हमें जरूर बताओ भाई! कमेंट बॉक्स किसलिए है?संवाद 1

"साहब, एक धांसू स्कीम लाया हूँ"
"..."

"अपने पास जो पनडुब्बी है न, उसके रेनोवेशन, अपग्रेडेशन का एस्टीमेट बनाते हैं..."
"..."

"एस्टीमेट पनडुब्बी की कीमत से भी ज्यादा बनाते हैं, पर आप पास करवा कर वर्क आर्डर करवा देना"
"..."

"फिर हम उस पनडुब्बी को अपने पास दो-चार महीने के लिए रख लेंगे, कुछ ऊपरी रंग-रोगन कर देंगे.."
"..."

"और आपको वापस डिलीवर कर देंगे"
"..."

"आप ऊपरी वेरिफिकेशन कर बिल पास करवा देना..."
"..."

"जब बिल पास हो जाए, और डिटेल वेरिफिकेशन से पहले और वर्करों से कम्प्लेन आने से पहले पनडुब्बी का काम तमाम कर देंगे..."
"वाह! वाह!! क्या धांसू स्कीम लाए हो यार! अभी के अभी प्रपोजल लाओ!!! हम आज के आज सेंक्शन करवाते हैं.. समझो प्लान एक्जीक्यूट हो गया!!!!"
--
संवाद 2
"साहब, एक धांसू स्कीम लाया हूं..."
"..."
"जमीन का एक टुकड़ा है. भाव एकदम हीरा. जंगल का है - वही पर्यावरण. तो उसे हमारे साथी के एनजीओ को 1 रूपए में सोशल कॉज के लिए अलॉट करवा दें"
"..."
"डर्ट सेटल हो जाने के बाद इसकी यूटीलिटी कमर्शियल में बदलवा लेंगे.."
"वाह! वाह!!! क्या स्कीम लाए हो यार!! समझो हो गया!!!"

संवाद 3
"साहब, एक धांसू स्कीम लाया हूं..."
"..."
"कुछ खदानें हैं हमारे आदमियों को बांट देते हैं..."
"..."
"जब हो हल्ला मचेगा तब फ़ाइलों को ग़ायब करवा देंगे - न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी..."
"वाह! वाह!! क्या शानदार स्कीम लाए हो! समझो हो गया!!!"

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ऐसे संवाद अंतहीन हैं. कितना लिखेंगे, कितना बताएंगे?
आपके पास अलग किस्म का संवाद है? अरे! तब तो हमें जरूर बताओ भाई! कमेंट बॉक्स किसलिए है?

इंटरनेट अपराध सत्यकथा – शार्किंग, व्हेलिंग और पॉम्फ्रेलिंग


यह एक आश्चर्यचकित कर देने वाली जासूसी सत्यकथा है.
इंटरनेटी जालसाज लोगों को फांसने के नित्य नए-नए तरीके आज़मा रहे हैं - आप पढ़ेंगे तो आश्चर्यचकित रह जाएंगे.
अभी तक तो हम आप फ़िशिंग से जूझ रहे थे, अब ये शार्किंग और व्हेलिंग जैसी चीजें भी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को परेशान करने आ गई हैं.





एंटीवायरस बनाने वाली आईटी सुरक्षा कंपनी एफ़सेक्योर के हेलसिंकी मुख्यालय के कार पार्किंग पर एक व्यक्ति अपनी शानदार, लक्झरी ऑडी आर-8 कार से उतरा, और सीधे प्रयोगशाला में जा पहुँचा. उसके हाथ में उसका लैपटॉप था जहाँ उसका परीक्षण किया जाना था.
वह आदमी था जेन्स कायलोनेन, जो कि एक बेहद सफल पेशेवर पोकर खिलाड़ी था – वास्तविक दुनिया में भी और ऑनलाइन पोकर की दुनिया में भी. जेन्स के बारे में आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि उसने महज पिछले वर्ष ही पोकर खेल कर 25 लाख डॉलर कमाए थे.
जेन्स अपना लैपटॉप क्यों लेकर आया था? जेन्स को कुछ शंका सी हुई थी कि उसके लैपटॉप में कुछ छेड़खानी की गई हो सकती है. और वह अपनी शंका का समाधान करने एफ़सेक्यूर की प्रयोगशाला पर पहुँचा था.
परंतु, उसे शंका हुई तो आखिर क्यों?
यह भी एक अलग कहानी है –
जेन्स यूरोपीय पोकर टूर्नामेंट में भाग लेने बार्सीलोना गया था. वहाँ वह एक पाँच सितारा होटल में ठहरा हुआ था. वह लगभग पूरे दिन टूनामेंट के टेबल पर मैच खेलता रहा. बीच में थोड़ा विराम लेकर अपने लैपटॉप पर इंटरनेट पर मेल इत्यादि चेक करने के लिए वह अपने कमरे में गया. वहाँ उसकी हाई सीक्यूरिटी वाली इलेक्ट्रॉनिक चाबी ने काम करने से मना कर दिया और कमरा नहीं खुला. तो वह रिसेप्शन पहुंचा जहाँ उसकी चाबी बदल दी गई. जब वह कमरे में पहुंचा तो उसने देखा कि उसका लैपटॉप उसके कमरे में नहीं था. उसे लगा कि उसका मित्र जो उसी होटल में ठहरा था शायद उसने उसके लैपटॉप को किसी काम के चलते उठाया हो. या कमरे की सफाई करने वाले कर्मी ने कहीं इधर उधर रख दिया हो. उसका लैपटॉप बड़े आकार का था और कमरे में कहीं दब छुप नहीं सकता था. कमरे में लैपटॉप नहीं दिखा, तो वह अपने मित्र के पास पता करने गया. मित्र ने बताया कि उसने उसका लैपटॉप नहीं लिया है.
परेशान सा वह थोड़ी देर बाद वापस अपने कमरे में आया तो उसे उसका लेपटॉप सामने टेबल पर ही रखा मिला. और जब उसने विंडोज़ बूट करने की कोशिश की तो उसका विंडोज़ ठीक से बूट नहीं हुआ और एकाध बार रीस्टार्ट करने पर चला.
जेन्स को शंका हुई कि उसके लैपटॉप में किसी न किसी तरह की छेड़खानी की गई है. वह तो भला हो कि वह ऐसे समय अपने कमरे में पहुंचा जब उसका लैपटॉप वहां नहीं था, अन्यथा उसे शंका ही नहीं होती. तो वह उस लैपटॉप को लेकर सीधे एफ़सेक्यूर के ऑफ़िस पहुंच गया कि सुनिश्चित कर लें कि मामला ठीक ठाक तो है. ऑनलाइन पोकर खेलने वालों के लिए अपने कंप्यूटर और लैपटॉप की सुरक्षा बेहद जरूरी है, अन्यथा उनका तो कैरियर न सिर्फ चौपट हो जाएगा, उनका बड़ा नुकसान हो जाएगा.
प्रयोगशाला में लैपटॉप के परीक्षण में पता चल गया कि जेन्स के कंप्यूटर में एक रैट (रिमोट ऐक्सेस ट्रोजन) चोरी छुपे इंस्टाल कर दिया गया था. यह रैट किसी यूएसबी उपकरण के द्वारा उसके कंप्यूटर में इंस्टाल किया गया था. यह रैट उपयोगकर्ता के कंप्यूटर को रिमोट से नियंत्रित और मॉनीटर कर सकता है. पाँच सितारा होटल के उसके कमरे में घुस कर किसी ने उसके लैपटॉप में वायरस डाला. यह घटना निःसंदेह सबको चौंकाती है.
नीचे ऑनलाइन पोकर गेम के स्क्रीनशॉट दिए गए हैं कि यह रैट कैसे काम करता है – हैकर अपने प्रतिद्वंद्वी के पत्ते देख सकता है, और इस तरह से गेम जीत सकता है –
clip_image001
यहाँ हमलावर 946 है जिसने 777 के कंप्यूटर पर कब्जा जमाया हुआ है
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हमलावर 777 के पत्ते देख रहा है.
जेन्स के लैपटॉप का परीक्षण करने के बाद, अन्य पोकर खिलाड़ियों को सचेत किया गया तो पाया गया कि एक और पेशेवर खिलाड़ी के लैपटॉप में ठीक ऐसे ही तरीके से यही रैट इंस्टाल किया गया था. यानी भले ही आप इंटरनेट पर पूरी सुरक्षा बरत लें, यदि आप अपने लैपटॉप / कंप्यूटर पर पूरी निगरानी नहीं रखते हैं तो आपका दुश्मन खुद वहाँ तक पहुँच बना कर आपके कंप्यूटर पर वायरस डाल सकता है.
इस तरह की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं और इसीलिए इन्हें नया नाम दिया गया है – शार्किंग. व्हेलिंग भी कुछ इसी तरह का खेल होता है जहाँ बड़े बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों को निशाना बनाया जाता है.
कहानी व चित्र – एफ़सेक्यूर ब्लॉग से साभार.
पुनश्च –
अब आप मेरी अपनी ताज़ा कहानी भी सुन लीजिए.
हाल ही में मैंने कुछ ऑनलाइन खरीदी की. भारत के एक मशहूर ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी से. छूट आकर्षक थी तो मैंने ऑनलाइन ऑर्डर कर ही दिया था. ऑर्डर करने के लिए कंपनी की साइट पर अपना फ़ोन नंबर पंजीकृत करना आवश्यक था.
खरीदी के एक-दो दिन बाद ही (उक्त कंपनी में दर्ज) मेरे फ़ोन नंबर पर मेरे पास लक्ष्य किए गए (यानी की कॉल करने वालों को पता था कि मैंने कुछ खरीदी की है, और मेरी खरीदी के पैटर्न के मुताबिक, मैं भी एक 'आसामी' हूँ इसलिए और भी बहुत कुछ खरीद सकता हूँ!) फ़ोन कॉल आने लगे. यहाँ यह बता दूं कि मेरा नंबर डीएनडी है और निजी है, और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है. जाहिर है, मेरा नंबर कंपनी में ऑनलाइन खरीदी के दौरान ही कहीं से उड़ाया गया होगा. बहुत संभव है कि कूरियर कंपनी के डिलीवरी एंड पाइंट से उड़ाया गया हो – थोड़े से पैसे के लिए लोग यह भी करते हैं! मैंने कंपनी को अपनी शिकायत दर्ज कर दी है. परंतु मेरे मन में ऑनलाइन शॉपिंग के लिए जो भय बैठ गया है उसका क्या? और, अब इस तरह के अपराध को क्या नाम दिया जाए – पॉम्फ्रेलिंग?
----एंटीवायरस बनाने वाली आईटी सुरक्षा कंपनी एफ़सेक्योर के हेलसिंकी मुख्यालय के कार पार्किंग पर एक व्यक्ति अपनी शानदार, लक्झरी ऑडी आर-8 कार से उतरा, और सीधे प्रयोगशाला में जा पहुँचा. उसके हाथ में उसका लैपटॉप था जहाँ उसका परीक्षण किया जाना था.
वह आदमी था जेन्स कायलोनेन, जो कि एक बेहद सफल पेशेवर पोकर खिलाड़ी था – वास्तविक दुनिया में भी और ऑनलाइन पोकर की दुनिया में भी. जेन्स के बारे में आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि उसने महज पिछले वर्ष ही पोकर खेल कर 25 लाख डॉलर कमाए थे.
जेन्स अपना लैपटॉप क्यों लेकर आया था? जेन्स को कुछ शंका सी हुई थी कि उसके लैपटॉप में कुछ छेड़खानी की गई हो सकती है. और वह अपनी शंका का समाधान करने एफ़सेक्यूर की प्रयोगशाला पर पहुँचा था.
परंतु, उसे शंका हुई तो आखिर क्यों?
यह भी एक अलग कहानी है –
जेन्स यूरोपीय पोकर टूर्नामेंट में भाग लेने बार्सीलोना गया था. वहाँ वह एक पाँच सितारा होटल में ठहरा हुआ था. वह लगभग पूरे दिन टूनामेंट के टेबल पर मैच खेलता रहा. बीच में थोड़ा विराम लेकर अपने लैपटॉप पर इंटरनेट पर मेल इत्यादि चेक करने के लिए वह अपने कमरे में गया. वहाँ उसकी हाई सीक्यूरिटी वाली इलेक्ट्रॉनिक चाबी ने काम करने से मना कर दिया और कमरा नहीं खुला. तो वह रिसेप्शन पहुंचा जहाँ उसकी चाबी बदल दी गई. जब वह कमरे में पहुंचा तो उसने देखा कि उसका लैपटॉप उसके कमरे में नहीं था. उसे लगा कि उसका मित्र जो उसी होटल में ठहरा था शायद उसने उसके लैपटॉप को किसी काम के चलते उठाया हो. या कमरे की सफाई करने वाले कर्मी ने कहीं इधर उधर रख दिया हो. उसका लैपटॉप बड़े आकार का था और कमरे में कहीं दब छुप नहीं सकता था. कमरे में लैपटॉप नहीं दिखा, तो वह अपने मित्र के पास पता करने गया. मित्र ने बताया कि उसने उसका लैपटॉप नहीं लिया है.
परेशान सा वह थोड़ी देर बाद वापस अपने कमरे में आया तो उसे उसका लेपटॉप सामने टेबल पर ही रखा मिला. और जब उसने विंडोज़ बूट करने की कोशिश की तो उसका विंडोज़ ठीक से बूट नहीं हुआ और एकाध बार रीस्टार्ट करने पर चला.
जेन्स को शंका हुई कि उसके लैपटॉप में किसी न किसी तरह की छेड़खानी की गई है. वह तो भला हो कि वह ऐसे समय अपने कमरे में पहुंचा जब उसका लैपटॉप वहां नहीं था, अन्यथा उसे शंका ही नहीं होती. तो वह उस लैपटॉप को लेकर सीधे एफ़सेक्यूर के ऑफ़िस पहुंच गया कि सुनिश्चित कर लें कि मामला ठीक ठाक तो है. ऑनलाइन पोकर खेलने वालों के लिए अपने कंप्यूटर और लैपटॉप की सुरक्षा बेहद जरूरी है, अन्यथा उनका तो कैरियर न सिर्फ चौपट हो जाएगा, उनका बड़ा नुकसान हो जाएगा.
प्रयोगशाला में लैपटॉप के परीक्षण में पता चल गया कि जेन्स के कंप्यूटर में एक रैट (रिमोट ऐक्सेस ट्रोजन) चोरी छुपे इंस्टाल कर दिया गया था. यह रैट किसी यूएसबी उपकरण के द्वारा उसके कंप्यूटर में इंस्टाल किया गया था. यह रैट उपयोगकर्ता के कंप्यूटर को रिमोट से नियंत्रित और मॉनीटर कर सकता है. पाँच सितारा होटल के उसके कमरे में घुस कर किसी ने उसके लैपटॉप में वायरस डाला. यह घटना निःसंदेह सबको चौंकाती है.
नीचे ऑनलाइन पोकर गेम के स्क्रीनशॉट दिए गए हैं कि यह रैट कैसे काम करता है – हैकर अपने प्रतिद्वंद्वी के पत्ते देख सकता है, और इस तरह से गेम जीत सकता है –
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यहाँ हमलावर 946 है जिसने 777 के कंप्यूटर पर कब्जा जमाया हुआ है
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हमलावर 777 के पत्ते देख रहा है.
जेन्स के लैपटॉप का परीक्षण करने के बाद, अन्य पोकर खिलाड़ियों को सचेत किया गया तो पाया गया कि एक और पेशेवर खिलाड़ी के लैपटॉप में ठीक ऐसे ही तरीके से यही रैट इंस्टाल किया गया था. यानी भले ही आप इंटरनेट पर पूरी सुरक्षा बरत लें, यदि आप अपने लैपटॉप / कंप्यूटर पर पूरी निगरानी नहीं रखते हैं तो आपका दुश्मन खुद वहाँ तक पहुँच बना कर आपके कंप्यूटर पर वायरस डाल सकता है.
इस तरह की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं और इसीलिए इन्हें नया नाम दिया गया है – शार्किंग. व्हेलिंग भी कुछ इसी तरह का खेल होता है जहाँ बड़े बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों को निशाना बनाया जाता है.
कहानी व चित्र – एफ़सेक्यूर ब्लॉग से साभार.
पुनश्च –
अब आप मेरी अपनी ताज़ा कहानी भी सुन लीजिए.
हाल ही में मैंने कुछ ऑनलाइन खरीदी की. भारत के एक मशहूर ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी से. छूट आकर्षक थी तो मैंने ऑनलाइन ऑर्डर कर ही दिया था. ऑर्डर करने के लिए कंपनी की साइट पर अपना फ़ोन नंबर पंजीकृत करना आवश्यक था.
खरीदी के एक-दो दिन बाद ही (उक्त कंपनी में दर्ज) मेरे फ़ोन नंबर पर मेरे पास लक्ष्य किए गए (यानी की कॉल करने वालों को पता था कि मैंने कुछ खरीदी की है, और मेरी खरीदी के पैटर्न के मुताबिक, मैं भी एक 'आसामी' हूँ इसलिए और भी बहुत कुछ खरीद सकता हूँ!) फ़ोन कॉल आने लगे. यहाँ यह बता दूं कि मेरा नंबर डीएनडी है और निजी है, और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है. जाहिर है, मेरा नंबर कंपनी में ऑनलाइन खरीदी के दौरान ही कहीं से उड़ाया गया होगा. बहुत संभव है कि कूरियर कंपनी के डिलीवरी एंड पाइंट से उड़ाया गया हो – थोड़े से पैसे के लिए लोग यह भी करते हैं! मैंने कंपनी को अपनी शिकायत दर्ज कर दी है. परंतु मेरे मन में ऑनलाइन शॉपिंग के लिए जो भय बैठ गया है उसका क्या? और, अब इस तरह के अपराध को क्या नाम दिया जाए – पॉम्फ्रेलिंग?
----एंटीवायरस बनाने वाली आईटी सुरक्षा कंपनी एफ़सेक्योर के हेलसिंकी मुख्यालय के कार पार्किंग पर एक व्यक्ति अपनी शानदार, लक्झरी ऑडी आर-8 कार से उतरा, और सीधे प्रयोगशाला में जा पहुँचा. उसके हाथ में उसका लैपटॉप था जहाँ उसका परीक्षण किया जाना था.
वह आदमी था जेन्स कायलोनेन, जो कि एक बेहद सफल पेशेवर पोकर खिलाड़ी था – वास्तविक दुनिया में भी और ऑनलाइन पोकर की दुनिया में भी. जेन्स के बारे में आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि उसने महज पिछले वर्ष ही पोकर खेल कर 25 लाख डॉलर कमाए थे.
जेन्स अपना लैपटॉप क्यों लेकर आया था? जेन्स को कुछ शंका सी हुई थी कि उसके लैपटॉप में कुछ छेड़खानी की गई हो सकती है. और वह अपनी शंका का समाधान करने एफ़सेक्यूर की प्रयोगशाला पर पहुँचा था.
परंतु, उसे शंका हुई तो आखिर क्यों?
यह भी एक अलग कहानी है –
जेन्स यूरोपीय पोकर टूर्नामेंट में भाग लेने बार्सीलोना गया था. वहाँ वह एक पाँच सितारा होटल में ठहरा हुआ था. वह लगभग पूरे दिन टूनामेंट के टेबल पर मैच खेलता रहा. बीच में थोड़ा विराम लेकर अपने लैपटॉप पर इंटरनेट पर मेल इत्यादि चेक करने के लिए वह अपने कमरे में गया. वहाँ उसकी हाई सीक्यूरिटी वाली इलेक्ट्रॉनिक चाबी ने काम करने से मना कर दिया और कमरा नहीं खुला. तो वह रिसेप्शन पहुंचा जहाँ उसकी चाबी बदल दी गई. जब वह कमरे में पहुंचा तो उसने देखा कि उसका लैपटॉप उसके कमरे में नहीं था. उसे लगा कि उसका मित्र जो उसी होटल में ठहरा था शायद उसने उसके लैपटॉप को किसी काम के चलते उठाया हो. या कमरे की सफाई करने वाले कर्मी ने कहीं इधर उधर रख दिया हो. उसका लैपटॉप बड़े आकार का था और कमरे में कहीं दब छुप नहीं सकता था. कमरे में लैपटॉप नहीं दिखा, तो वह अपने मित्र के पास पता करने गया. मित्र ने बताया कि उसने उसका लैपटॉप नहीं लिया है.
परेशान सा वह थोड़ी देर बाद वापस अपने कमरे में आया तो उसे उसका लेपटॉप सामने टेबल पर ही रखा मिला. और जब उसने विंडोज़ बूट करने की कोशिश की तो उसका विंडोज़ ठीक से बूट नहीं हुआ और एकाध बार रीस्टार्ट करने पर चला.
जेन्स को शंका हुई कि उसके लैपटॉप में किसी न किसी तरह की छेड़खानी की गई है. वह तो भला हो कि वह ऐसे समय अपने कमरे में पहुंचा जब उसका लैपटॉप वहां नहीं था, अन्यथा उसे शंका ही नहीं होती. तो वह उस लैपटॉप को लेकर सीधे एफ़सेक्यूर के ऑफ़िस पहुंच गया कि सुनिश्चित कर लें कि मामला ठीक ठाक तो है. ऑनलाइन पोकर खेलने वालों के लिए अपने कंप्यूटर और लैपटॉप की सुरक्षा बेहद जरूरी है, अन्यथा उनका तो कैरियर न सिर्फ चौपट हो जाएगा, उनका बड़ा नुकसान हो जाएगा.
प्रयोगशाला में लैपटॉप के परीक्षण में पता चल गया कि जेन्स के कंप्यूटर में एक रैट (रिमोट ऐक्सेस ट्रोजन) चोरी छुपे इंस्टाल कर दिया गया था. यह रैट किसी यूएसबी उपकरण के द्वारा उसके कंप्यूटर में इंस्टाल किया गया था. यह रैट उपयोगकर्ता के कंप्यूटर को रिमोट से नियंत्रित और मॉनीटर कर सकता है. पाँच सितारा होटल के उसके कमरे में घुस कर किसी ने उसके लैपटॉप में वायरस डाला. यह घटना निःसंदेह सबको चौंकाती है.
नीचे ऑनलाइन पोकर गेम के स्क्रीनशॉट दिए गए हैं कि यह रैट कैसे काम करता है – हैकर अपने प्रतिद्वंद्वी के पत्ते देख सकता है, और इस तरह से गेम जीत सकता है –
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यहाँ हमलावर 946 है जिसने 777 के कंप्यूटर पर कब्जा जमाया हुआ है
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हमलावर 777 के पत्ते देख रहा है.
जेन्स के लैपटॉप का परीक्षण करने के बाद, अन्य पोकर खिलाड़ियों को सचेत किया गया तो पाया गया कि एक और पेशेवर खिलाड़ी के लैपटॉप में ठीक ऐसे ही तरीके से यही रैट इंस्टाल किया गया था. यानी भले ही आप इंटरनेट पर पूरी सुरक्षा बरत लें, यदि आप अपने लैपटॉप / कंप्यूटर पर पूरी निगरानी नहीं रखते हैं तो आपका दुश्मन खुद वहाँ तक पहुँच बना कर आपके कंप्यूटर पर वायरस डाल सकता है.
इस तरह की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं और इसीलिए इन्हें नया नाम दिया गया है – शार्किंग. व्हेलिंग भी कुछ इसी तरह का खेल होता है जहाँ बड़े बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों को निशाना बनाया जाता है.
कहानी व चित्र – एफ़सेक्यूर ब्लॉग से साभार.
पुनश्च –
अब आप मेरी अपनी ताज़ा कहानी भी सुन लीजिए.
हाल ही में मैंने कुछ ऑनलाइन खरीदी की. भारत के एक मशहूर ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी से. छूट आकर्षक थी तो मैंने ऑनलाइन ऑर्डर कर ही दिया था. ऑर्डर करने के लिए कंपनी की साइट पर अपना फ़ोन नंबर पंजीकृत करना आवश्यक था.
खरीदी के एक-दो दिन बाद ही (उक्त कंपनी में दर्ज) मेरे फ़ोन नंबर पर मेरे पास लक्ष्य किए गए (यानी की कॉल करने वालों को पता था कि मैंने कुछ खरीदी की है, और मेरी खरीदी के पैटर्न के मुताबिक, मैं भी एक 'आसामी' हूँ इसलिए और भी बहुत कुछ खरीद सकता हूँ!) फ़ोन कॉल आने लगे. यहाँ यह बता दूं कि मेरा नंबर डीएनडी है और निजी है, और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है. जाहिर है, मेरा नंबर कंपनी में ऑनलाइन खरीदी के दौरान ही कहीं से उड़ाया गया होगा. बहुत संभव है कि कूरियर कंपनी के डिलीवरी एंड पाइंट से उड़ाया गया हो – थोड़े से पैसे के लिए लोग यह भी करते हैं! मैंने कंपनी को अपनी शिकायत दर्ज कर दी है. परंतु मेरे मन में ऑनलाइन शॉपिंग के लिए जो भय बैठ गया है उसका क्या? और, अब इस तरह के अपराध को क्या नाम दिया जाए – पॉम्फ्रेलिंग?
----एंटीवायरस बनाने वाली आईटी सुरक्षा कंपनी एफ़सेक्योर के हेलसिंकी मुख्यालय के कार पार्किंग पर एक व्यक्ति अपनी शानदार, लक्झरी ऑडी आर-8 कार से उतरा, और सीधे प्रयोगशाला में जा पहुँचा. उसके हाथ में उसका लैपटॉप था जहाँ उसका परीक्षण किया जाना था.
वह आदमी था जेन्स कायलोनेन, जो कि एक बेहद सफल पेशेवर पोकर खिलाड़ी था – वास्तविक दुनिया में भी और ऑनलाइन पोकर की दुनिया में भी. जेन्स के बारे में आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि उसने महज पिछले वर्ष ही पोकर खेल कर 25 लाख डॉलर कमाए थे.
जेन्स अपना लैपटॉप क्यों लेकर आया था? जेन्स को कुछ शंका सी हुई थी कि उसके लैपटॉप में कुछ छेड़खानी की गई हो सकती है. और वह अपनी शंका का समाधान करने एफ़सेक्यूर की प्रयोगशाला पर पहुँचा था.
परंतु, उसे शंका हुई तो आखिर क्यों?
यह भी एक अलग कहानी है –
जेन्स यूरोपीय पोकर टूर्नामेंट में भाग लेने बार्सीलोना गया था. वहाँ वह एक पाँच सितारा होटल में ठहरा हुआ था. वह लगभग पूरे दिन टूनामेंट के टेबल पर मैच खेलता रहा. बीच में थोड़ा विराम लेकर अपने लैपटॉप पर इंटरनेट पर मेल इत्यादि चेक करने के लिए वह अपने कमरे में गया. वहाँ उसकी हाई सीक्यूरिटी वाली इलेक्ट्रॉनिक चाबी ने काम करने से मना कर दिया और कमरा नहीं खुला. तो वह रिसेप्शन पहुंचा जहाँ उसकी चाबी बदल दी गई. जब वह कमरे में पहुंचा तो उसने देखा कि उसका लैपटॉप उसके कमरे में नहीं था. उसे लगा कि उसका मित्र जो उसी होटल में ठहरा था शायद उसने उसके लैपटॉप को किसी काम के चलते उठाया हो. या कमरे की सफाई करने वाले कर्मी ने कहीं इधर उधर रख दिया हो. उसका लैपटॉप बड़े आकार का था और कमरे में कहीं दब छुप नहीं सकता था. कमरे में लैपटॉप नहीं दिखा, तो वह अपने मित्र के पास पता करने गया. मित्र ने बताया कि उसने उसका लैपटॉप नहीं लिया है.
परेशान सा वह थोड़ी देर बाद वापस अपने कमरे में आया तो उसे उसका लेपटॉप सामने टेबल पर ही रखा मिला. और जब उसने विंडोज़ बूट करने की कोशिश की तो उसका विंडोज़ ठीक से बूट नहीं हुआ और एकाध बार रीस्टार्ट करने पर चला.
जेन्स को शंका हुई कि उसके लैपटॉप में किसी न किसी तरह की छेड़खानी की गई है. वह तो भला हो कि वह ऐसे समय अपने कमरे में पहुंचा जब उसका लैपटॉप वहां नहीं था, अन्यथा उसे शंका ही नहीं होती. तो वह उस लैपटॉप को लेकर सीधे एफ़सेक्यूर के ऑफ़िस पहुंच गया कि सुनिश्चित कर लें कि मामला ठीक ठाक तो है. ऑनलाइन पोकर खेलने वालों के लिए अपने कंप्यूटर और लैपटॉप की सुरक्षा बेहद जरूरी है, अन्यथा उनका तो कैरियर न सिर्फ चौपट हो जाएगा, उनका बड़ा नुकसान हो जाएगा.
प्रयोगशाला में लैपटॉप के परीक्षण में पता चल गया कि जेन्स के कंप्यूटर में एक रैट (रिमोट ऐक्सेस ट्रोजन) चोरी छुपे इंस्टाल कर दिया गया था. यह रैट किसी यूएसबी उपकरण के द्वारा उसके कंप्यूटर में इंस्टाल किया गया था. यह रैट उपयोगकर्ता के कंप्यूटर को रिमोट से नियंत्रित और मॉनीटर कर सकता है. पाँच सितारा होटल के उसके कमरे में घुस कर किसी ने उसके लैपटॉप में वायरस डाला. यह घटना निःसंदेह सबको चौंकाती है.
नीचे ऑनलाइन पोकर गेम के स्क्रीनशॉट दिए गए हैं कि यह रैट कैसे काम करता है – हैकर अपने प्रतिद्वंद्वी के पत्ते देख सकता है, और इस तरह से गेम जीत सकता है –
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यहाँ हमलावर 946 है जिसने 777 के कंप्यूटर पर कब्जा जमाया हुआ है
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हमलावर 777 के पत्ते देख रहा है.
जेन्स के लैपटॉप का परीक्षण करने के बाद, अन्य पोकर खिलाड़ियों को सचेत किया गया तो पाया गया कि एक और पेशेवर खिलाड़ी के लैपटॉप में ठीक ऐसे ही तरीके से यही रैट इंस्टाल किया गया था. यानी भले ही आप इंटरनेट पर पूरी सुरक्षा बरत लें, यदि आप अपने लैपटॉप / कंप्यूटर पर पूरी निगरानी नहीं रखते हैं तो आपका दुश्मन खुद वहाँ तक पहुँच बना कर आपके कंप्यूटर पर वायरस डाल सकता है.
इस तरह की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं और इसीलिए इन्हें नया नाम दिया गया है – शार्किंग. व्हेलिंग भी कुछ इसी तरह का खेल होता है जहाँ बड़े बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों को निशाना बनाया जाता है.
कहानी व चित्र – एफ़सेक्यूर ब्लॉग से साभार.
पुनश्च –
अब आप मेरी अपनी ताज़ा कहानी भी सुन लीजिए.
हाल ही में मैंने कुछ ऑनलाइन खरीदी की. भारत के एक मशहूर ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी से. छूट आकर्षक थी तो मैंने ऑनलाइन ऑर्डर कर ही दिया था. ऑर्डर करने के लिए कंपनी की साइट पर अपना फ़ोन नंबर पंजीकृत करना आवश्यक था.
खरीदी के एक-दो दिन बाद ही (उक्त कंपनी में दर्ज) मेरे फ़ोन नंबर पर मेरे पास लक्ष्य किए गए (यानी की कॉल करने वालों को पता था कि मैंने कुछ खरीदी की है, और मेरी खरीदी के पैटर्न के मुताबिक, मैं भी एक 'आसामी' हूँ इसलिए और भी बहुत कुछ खरीद सकता हूँ!) फ़ोन कॉल आने लगे. यहाँ यह बता दूं कि मेरा नंबर डीएनडी है और निजी है, और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है. जाहिर है, मेरा नंबर कंपनी में ऑनलाइन खरीदी के दौरान ही कहीं से उड़ाया गया होगा. बहुत संभव है कि कूरियर कंपनी के डिलीवरी एंड पाइंट से उड़ाया गया हो – थोड़े से पैसे के लिए लोग यह भी करते हैं! मैंने कंपनी को अपनी शिकायत दर्ज कर दी है. परंतु मेरे मन में ऑनलाइन शॉपिंग के लिए जो भय बैठ गया है उसका क्या? और, अब इस तरह के अपराध को क्या नाम दिया जाए – पॉम्फ्रेलिंग?
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