Saturday, January 18, 2014

इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे निकलेंगे जो देखने में तो भारतीय होंगे लेकिन दिमाग से अंग्रेज होंगे" - मेकॉले

ये मेकॉले का इण्डिया है :
मैकोले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी बहुत मशहूर
चिट्ठी है
वो, उसमे वो लिखता है कि “इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे
निकलेंगे जो देखने में तो भारतीय होंगे लेकिन दिमाग से
अंग्रेज होंगे
और इन्हें अपने देश के बारे में कुछ पता नहीं होगा,
इनको अपने
संस्कृति के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने
परम्पराओं के
बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने मुहावरे
नहीं मालूम होंगे,
जब ऐसे बच्चे होंगे इस देश में तो अंग्रेज भले ही चले जाएँ इस
देश
से अंग्रेजियत नहीं जाएगी और भारत शारीरिक रूप से
आजाद होने
पर भी मानसिक रूप से हमेशा हमारा गुलाम बना रहेगा”
यही सच आज हमारे सामने है स्कूल्स लवर पॉइंट्स बन गए
हैं.......बिलकु ल जिस तरह मेकॉले चाहता था........!!
कुछ जीत ऐसी होती हैं जिन पर कभी आंच नहीं आती। यह
ऐसा साम्राज्य है जिसे कोई समाप्त नहीं कर सकता। यह
अविनाशी साम्राज्य अँग्रेजी भाषा, कला और कानून
का है।”हमें
अंग्रेज़ी साम्राज्य के विस्तार के लिए एक ऐसा वर्ग
बनाना है
जो अपनी जड़ों से घृणा करे। वे लोग रंग व रक्त से
हिंदुस्तानी होंगे
किन्तु आचार-व्यवहार में अंग्रेज़ होंगे।”
अंग्रेजो ने 1758में कलकत्ता में पहला शराबखाना खोला,
जहाँ पहले साल वहाँ सिर्फ अंग्रेज जाते थे। आज पूरा भारत
जाता है।
सन् 1947 में 3.5 हजार शराबखानो को सरकार
का लाइसेंस.....!!
सन् 2009-10 में लगभग 25,400 दुकानों को मौत
का व्यापार
करनेकी इजाजत।
चरित्र से निर्बल बनाने केलिए सन् 1760 में भारत में
पहला वेश्याघर कलकत्ता में सोनागाछी में अंग्रेजों ने
खोला और
लगभग 200 स्त्रियों को जबरदस्ती इस काममें
लगाया गया।
आज अंग्रेजों केजाने के 64 सालोंके बाद, आज लगभग
20,80,000 माताएँ, बहनें इस गलत काम में लिप्त हैं।
अंग्रेजों के जाने के बाद जहाँ इनकी संख्या में
कमी होनी चाहिए
थी वहीं इनकी संख्या में दिन दुनी रात
चौगुनीवृद्धि हो रही है !!
देश घोर संकट में है नैतिक और चारित्रिक पतन भारत के
अस्तित्व
को मिटाने की और बढ़ रहा है..........भार त के बर्बाद होने
की यही गति रही और हम सोते रहे तो शायद हम अपने देश
को कभी न बचा पायें

No comments:

Post a Comment